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    पंडित भीमसेन जोशी की ट्रेन कथा: राग भैरव से जुर्माना माफ, भारत रत्न तक सफर

    By January 23, 2026No Comments1 Min Read

    पंडित भीमसेन जोशी का नाम हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का पर्याय है। उनकी गायकी ने दिल जीते, जीवन ने प्रेरणा दी। 24 जनवरी, उनकी पुण्यतिथि पर उस बचपन की घटना का स्मरण, जब सुरों ने बिना टिकट यात्रा को संभव बनाया।

    11 साल के भीमसेन घर त्याग संगीत सीखने निकले। ट्रेन में बिना टिकट पकड़े गए तो राग भैरव गाकर सभी को वशीभूत कर लिया। यात्री भक्त हो गए, किराया भरा और गुरु के पास पहुंचाया।

    गड़ग में 1922 जन्मे, बचपन से संगीतमय। दुकानों पर रुककर सीखा। सवाई गंधर्व से वर्षों तपस्या की। मंच पर 19 में डेब्यू, मुंबई रेडियो स्टार बने।

    ख्याल सम्राट, ठुमरी, भजन, नाट्यसंगीत में निपुण। शुद्ध कल्याण, बसंत बहार, दरबारी जैसे रागों की गहराई अनुपम।

    देश ने पद्म पुरस्कार, भारत रत्न (2008), कर्नाटक रत्न दिए। वैश्विक ख्याति अर्जित। 2011 में पुणे में अंतिम यात्रा। सुरिल दुनिया में वे अमर हैं।

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