मौजूदा वित्त वर्ष 2026 में भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह 8.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। यह वृद्धि डिजिटल लेनदेन और बेहतर कर प्रशासन के कारण संभव हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर आधार में विस्तार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी ने राजस्व को बढ़ावा दिया है, जो भविष्य में राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद करेगा।