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    BRICS का महा-गठबंधन: डॉलर पर भारी पड़ेगा भारत-रूस-चीन का जोर?

    By December 29, 2025No Comments3 Mins Read

    2026 में भारत BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) की अध्यक्षता संभालेगा, जो इस गुट की बढ़ती वैश्विक प्रासंगिकता का एक स्पष्ट संकेत है। विशेष रूप से, अमेरिका की हालिया व्यापार और विदेश नीतियों ने अप्रत्याशित रूप से भारत, रूस और चीन को एक मंच पर लाकर BRICS को एक शक्तिशाली आर्थिक और राजनीतिक इकाई के रूप में स्थापित किया है।

    BRICS देशों का बढ़ता गठजोड़ अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रभुता के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है। हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि BRICS राष्ट्र, खाद्य सुरक्षा को रणनीतिक प्राथमिकता मानते हुए, कृषि क्षेत्र में सहयोग को गहरा कर रहे हैं। यह सहयोग कृषि व्यापार, उन्नत तकनीकों के आदान-प्रदान, जलवायु-अनुकूल खेती के तरीकों को अपनाने और मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने तक फैला हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 तक यह साझा रणनीति अमेरिकी आर्थिक प्रभाव को महत्वपूर्ण रूप से कम कर सकती है।

    **BRICS की वैश्विक आर्थिक ताकत:**

    BRICS का सामूहिक आर्थिक और संसाधन आधार इसे वैश्विक भू-राजनीति में एक मजबूत स्थिति प्रदान करता है।

    * **ऊर्जा संसाधन:** 2024 में BRICS देशों का कच्चे तेल का उत्पादन विश्व स्तर पर लगभग 42% रहा, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।
    * **बहुमूल्य धातुएं:** चीन और रूस मिलकर वैश्विक केंद्रीय बैंक स्वर्ण भंडार का 14% से अधिक रखते हैं। BRICS ब्लॉक की कुल स्वर्ण हिस्सेदारी लगभग 20% है, जो मौद्रिक स्थिरता में उनके प्रभाव को बढ़ाता है।
    * **आर्थिक क्षमता:** 2024 में, BRICS देशों ने वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 29% योगदान दिया। ब्राजील, रूस, भारत और चीन दुनिया की शीर्ष 11 अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हैं। सदस्य देशों की निरंतर आर्थिक वृद्धि और नए देशों के शामिल होने से BRICS की आर्थिक शक्ति और भी बढ़ेगी।

    **भारतीय रुपये का बढ़ता उपयोग:**

    भारत ने एक साहसिक कदम उठाते हुए, BRICS देशों के बीच 100% व्यापार भारतीय रुपये में करने की अनुमति दी है। यह पहल अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों को ‘वोस्ट्रो’ खाते खोलने की प्रक्रिया को सरल बनाया है, जिससे BRICS भागीदार देशों के लिए रुपये में लेनदेन आसान हो गया है। इस कदम से वैश्विक व्यापार में डॉलर के एकाधिकार को चुनौती मिलने की प्रबल संभावना है।

    **डॉलर-मुक्त भुगतान प्रणाली की ओर:**

    BRICS देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए एक वैकल्पिक, स्वतंत्र भुगतान प्रणाली विकसित करने पर तेजी से काम कर रहे हैं। यह पहल अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। ब्राजील के राजदूत ने पुष्टि की है कि इस BRICS भुगतान तंत्र को स्थापित करना संभव है और यह ब्लॉक के लिए एक सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह पहल रूस की 2024 की अध्यक्षता के दौरान शुरू हुई थी और वर्तमान में ब्राजील द्वारा आगे बढ़ाई जा रही है।

    **रूस से निरंतर तेल आपूर्ति:**

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने रूस से तेल का आयात जारी रखा है। दिसंबर 2024 में, भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल का दैनिक आयात 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आंकड़े को पार करने की उम्मीद है। यह दर्शाता है कि भारतीय रिफाइनरियां रियायती कीमतों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी प्रमुख कंपनियों ने भी गैर-प्रतिबंधित रूसी आपूर्तिकर्ताओं से तेल खरीदना फिर से शुरू कर दिया है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद कर रहा है। इन देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध पश्चिमी दबाव के बावजूद कायम हैं।

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